Illegal ploting !! অমর চ্যাটার্জী কে পাত্তা দিই না তো কাউন্সিলর কি ? কে বলল ?
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এবার বিস্ফোরক কথা বললেন আসানসোলের 31 নম্বর ওয়ার্ডের কাউন্সিলর আশা প্রসাদ। উক্ত এলাকায় গাড়ুই নদীর ধারে চলতে থাকা প্লটিং এর মালিক রা নাকি বলছেন ” অমর চ্যাটার্জি কে পাত্তা দি ই না তো কাউন্সিলর কি ? ”
এলাকায় প্লটিং হচ্ছে। জানেন না কাউন্সিলর। জায়গা নদীর না বৈধ প্লটিং তাও জানার অধিকার নেই কাউন্সিলরের। আবার এ এম সি লেখা পিলার পোঁতা হয়েছে তাও জানেন না কাউন্সিলর ! এমনটাই বক্তব্য তার। আর তা নিয়ে তিনি আসানসোলের মেয়র বিধান উপাধ্যায় কে জানালেও মেয়র কোনো গুরুত্ব দেয় নি বলে তার অভিযোগ। অবশেষে মন্ত্রীর দারোস্ত হয়েছেন তিনি বলে জানিয়েছেন।
প্রসঙ্গত, আসানসোলের 31 নম্বর ওয়ার্ডে বিশাল এলাকা জুড়ে গাড়ুই নদীর ধারে শুরু হয়েছে প্লটিং। এ এম সি লেখা পিলার দেওয়া হয়েছে নদীর ধারে। সূত্রের খবর নদীর অববাহিকা অর্থাৎ নদীর দু ধরে অন্তত 50 মিটারের মধ্যে কোনো কাজ করা যায় না। কিন্তু যে জায়গায় পিলার দেওয়া হয়েছে তা 10 ফুট ও নয় বলে ই অভিযোগ।
পড়ুন…কোথায় হচ্ছে ঘটনা ?
শুধু তাই উক্ত এলাকায় বৃষ্টি হলেই বন্যা দেখা দেয়। ডুবে যায় দ্বিতল বাড়িও। সেখানে এই রকম উদ্যোগ কে অবৈধ আখ্যা দিয়েছেন কাউন্সিলর আশা প্রসাদ।
তার দাবি..বার বার বলেও কোনো লাভ হয় নি। শুধু প্লটিং নয়। বড় বড় হাই রাইস বিল্ডিং ও হচ্ছে। কিন্তু সব কিছু ই তার নজর এড়িয়ে। বৈধতার প্রশ্ন তুলতে গেলেই মালিক রা বলছেন ” অমর চ্যাটার্জি কে পাত্তা দি ই না তো কাউন্সিলর কি ?
এলাকার মানুষের অভিযোগ..ফাঁকা জায়গা নদীর জায়গা ও বিক্রি হয়ে যাচ্ছে। ঘটনা ঘটলে কে নেবে দায়িত্ব।
নিকটবর্তী এক ব্যক্তির কথায়..পার্শবর্তী এক জায়গায় 13 টি এ এমসি লেখা পিলার রাখা আছে। 7 টি পিলার লাগানো হয়েছে। কিন্তু করপোরেশনের কেউ এই পিলার লাগায় নি। তাহলে লাগলো কে ? কাউন্সিলর ও জানেন না।
প্রশ্ন উঠেছে..এমন নয়ত ..যারা এই কাজ করছেন তারা নিজেদের লোক দিয়ে পিলার লাগিয়েছেন যাতে মনে হয় করপোরেশন পর্যবেক্ষণ করে গেছে ?
প্রসঙ্গত আসানসোলের মেয়র কয়েকদিন আগেই অবৈধ নির্মাণ ভাঙার নির্দেশ দিয়েছিলেন অপকার গার্ডেন এলাকায়। তিনি জানিয়েছিলেন..অবৈধ নির্মাণ চলবে না। এখন দেখার কি ব্যবস্থা নেই সংশ্লিষ্ট প্রশাসন !
নদী র ধার ধরে আসানসোলের বিভিন্ন জায়গায় জমি দখলের কাজ অব্যাহত। যে কারণে নদীর অববাহিকা বলে কিছু থাকছে না। আর সাধারণ মানুষ কে ক্ষতির সম্মুখীন হতে হচ্ছে। আসানসোলের বাই পাশের ধারে, তপসি বাবা এলাকায়, কাল্লা র কাছে এরকম নির্মাণ হচ্ছে বলে সূত্রের খবর। এখন দেখার প্রশাসন কি ব্যবস্থা নেই।
आसनसोल की गारुई नदी किनारे चल रहा जमीन में प्लाटिंग
काम सही नही बताया काउंसिलर ने
काम करनेवाले को बुलाने पर बात करने के लिए तैयार नही जमीन मालिक
जमीन मालिको की कहना है कि वो अमर चटर्जी को नही पूछते तो काउंसिलर क्या : कहा काउंसिलर आशा प्रसाद
दिन दहाड़े आसनसोल की 31 नवम्बर वार्ड में चल रहे जमीन में प्लाटिंग का काम। नदी किनारे लगाया गया ए एम सी लिखा हुआ पिलर। बताया जाता है कि नदी किनारे पिलर लगाने का मतलब नदी की रीवर बेड और प्लाटिंग की जमीन को अलग करना।
सूत्र के माने तो….नदी किनारे 50 मीटर के अंदर कोई काम नही हो सकता चूंकि उसे रीवर बेड कहा जाता है जो बाड़ का समय पानी निकालने का काम मे आता है। मतलब आम आदमी को नुकसान से राहत देती है। लेकिन आसनसोल के 31 नंबर वार्ड में गारुई नदी किनारे दिए गए पिलर 10 फिट दूरी में भी शायद नही होगा।
लेकिन काउंसिलर के मुतावेक..काउंसिलर आशा प्रसाद कुछ नही जानते। उन्हें पता ही नही है कि कौन पिलर लगाया ! जमीन की कागजाद सही है कि नही ! रीबर बेड दखल किया जा रहा है।
लेकिन काउंसिलर की कहना है..वे मेयर को भी सूचना दी है लेकिन कम कुछ नही हुआ। अंत मे शिकयत मंत्री तक पहुचाया है काउंसिलर ने।
दूसरी और गांववाले का कहना है..नदी की जमीन भी बिक जा रही है। आदमी पर किसीका ध्यान नही, ध्यान है पैसा पर। वही एक आदमी का कहना है..पिलर तो लगा जिसमे ए एम सी लिखा हुआ है। लेकिन वो पिलर नगर निगम वाले नही लगाया। लगाया दूसरा कोई।
दरअसल आसनसोल की कई इलाके में नदी किनारे जमीन दखल कर प्लाटिंग किये जाने की आरोप लग रहा है। सिर्फ ये नही, कुछ रोज पहले ही अबैध निर्माण को तोड़ा गया मेयर बिधान उपाध्याय के निर्देश पर। अब देखना प्रसासन अपना जिम्मेवारी कैसे निभाये।

